बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
महि पाताल नाक जसु ब्यापा। राम बरी सिय भंजेउ चापा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपृथ्वी, पाताल और स्वर्ग तीनों लोकोंमें यश फैल गया कि श्रीरामचन्द्रजीने धनुष तोड़ दिया और सीताजीको वरण कर लिया। नगरके नर-नारी आरती कर रहे हैं और अपनी पूँजी (हैसियत) को भुलाकर (सामथ्र्यसे बहुत अधिक) निछावर कर रहे हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 256 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
महि पाताल नाक जसु ब्यापा। राम बरी सिय भंजेउ चापा।।
करहिं आरती पुर नर नारी। देहिं निछावरि बित्त बिसारी।।
स्रोत अभिलेख 1.265 · पुस्तक पृ. 255, 256
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 महि पाताल नाक जसु ब्यापा। राम बरी सिय भंजेउ चापा।।
English explanation
Throughout earth, the netherworld, and heaven spread the glory of Sita choosing Rama as her husband and Rama breaking the bow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| महि | पृथ्वी में | on earth |
| पाताल | पाताल में | in the netherworld |
| नाक | स्वर्ग में | in heaven |
| जसु | यश | glory; renown |
| ब्यापा | फैल गया | spread |
| राम | राम को | Rama, as husband |
| बरी | वर चुना | chose as husband |
| सिय | सीता ने | Sita |
| भंजेउ | तोड़ दिया | broke |
| चापा | धनुष | the bow |
2 करहिं आरती पुर नर नारी। देहिं निछावरि बित्त बिसारी।।
English explanation
The city’s men and women perform arati and give lavish offerings, forgetting concern for their wealth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करहिं | करते हैं | perform |
| आरती | दीप घुमाकर आरती | arati, the ceremonial waving of lights |
| पुर | नगर के | of the city |
| नर | पुरुष | men |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
| देहिं | देते हैं | give |
| निछावरि | मंगलोत्सव के अर्पण | celebratory offerings |
| बित्त | धन | wealth |
| बिसारी | भुलाकर; परवाह छोड़कर | forgetting; disregarding concern for |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.265
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 256
- सहायक विषय
- जयमाल पहनाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 255, 256
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।