बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सोहति सीय राम कै जौरी। छबि सिंगारु मनहुँ एक ठोरी।।
मूल पाठ
सोहति सीय राम कै जौरी। छबि सिंगारु मनहुँ एक ठोरी।।
सखीं कहहिं प्रभुपद गहु सीता। करति न चरन परस अति भीता।।
स्रोत अभिलेख 1.265 · पुस्तक पृ. 255, 256
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीसीता-रामजीकी जोड़ी ऐसी सुशोभित हो रही है मानो सुन्दरता और शृंगाररस एकत्र हो गये हों। सखियाँ कह रही हैं—सीते! स्वामीके चरण छुओ; किन्तु सीताजी अत्यन्त भयभीत हुई उनके चरण नहीं छूतीं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 256 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सोहति सीय राम कै जौरी। छबि सिंगारु मनहुँ एक ठोरी।।
English explanation
The pair of Sita and Rama shines as though beauty and romantic grace have come together in one place.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोहति | शोभित होती है | looks radiant |
| सीय | सीता | Sita |
| राम | राम | Rama |
| कै | की | of |
| जौरी | जोड़ी | pair |
| छबि | सुंदरता | beauty |
| सिंगारु | शृंगार; प्रेममय सौंदर्य | romantic grace |
| मनहुँ | मानो | as though |
| एक | एक ही | one and the same |
| ठोरी | स्थान पर | in a place |
2 सखीं कहहिं प्रभुपद गहु सीता। करति न चरन परस अति भीता।।
English explanation
Her companions say, “Sita, take hold of the Lord’s feet.” But, very apprehensive, she does not touch his feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सखीं | सखियाँ | female companions |
| कहहिं | कहती हैं | say |
| प्रभुपद | प्रभु राम के चरण | Lord Rama’s feet |
| गहु | पकड़ो | take hold of |
| सीता | हे सीता | O Sita |
| करति | करती हैं | does |
| न | नहीं | not |
| चरन | चरणों का | of the feet |
| परस | स्पर्श | touching |
| अति | अत्यंत | very |
| भीता | भयभीत | apprehensive; afraid |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.265
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 256
- सहायक विषय
- जयमाल पहनाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 255, 256
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