बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मनहीं मन महेसु मुसुकाहीं। हरि के बिंग्य बचन नहिं जाहीं।।
मूल पाठ
मनहीं मन महेसु मुसुकाहीं। हरि के बिंग्य बचन नहिं जाहीं।।
अति प्रिय बचन सुनत प्रिय केरे। भृंगिहि प्रेरि सकल गन टेरे।।
स्रोत अभिलेख 1.93 · पुस्तक पृ. 106, 107
भावार्थ
मूल पाठ के बादमहादेवजी [यह देखकर] मन-ही-मन मुसकराते हैं कि विष्णुभगवान्के व्यङ्ग्य-वचन (दिल्लगी) नहीं छूटते। अपने प्यारे (विष्णुभगवान्) के इन अति प्रिय वचनोंको सुनकर शिवजीने भी भृङ्गीको भेजकर अपने सब गणोंको बुलवा लिया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 107 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मनहीं मन महेसु मुसुकाहीं। हरि के बिंग्य बचन नहिं जाहीं।।
English explanation
Shiva smiles inwardly; the teasing intent of Vishnu's words does not escape him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मनहीं | मन ही में | inwardly |
| मन | मन में | within the mind |
| महेसु | महेश, भगवान शिव | Shiva, the great Lord |
| मुसुकाहीं | मुसकराते हैं | smiles |
| हरि | हरि, भगवान विष्णु | Vishnu |
| के | के | of |
| बिंग्य | व्यंग्यपूर्ण; चुटकी लेने वाले | teasing; ironic |
| बचन | वचन | words |
| नहिं | नहीं | not |
| जाहीं | छिपे रहते; समझ से निकल जाते | escape his understanding |
2 अति प्रिय बचन सुनत प्रिय केरे। भृंगिहि प्रेरि सकल गन टेरे।।
English explanation
On hearing the very pleasing words of his dear Vishnu, Shiva directed Bhringi to summon all his attendants.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | very |
| प्रिय | प्रिय; मनभावन | pleasing |
| बचन | वचन | words |
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| प्रिय | प्रिय विष्णु | his dear Vishnu |
| केरे | के | of |
| भृंगिहि | भृंगी को, शिव के गण को | Bhringi, Shiva's attendant |
| प्रेरि | निर्देश देकर | having directed |
| सकल | सभी | all |
| गन | शिव के गण | Shiva's attendants |
| टेरे | बुलाए | summoned |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.93
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 107
- सहायक विषय
- देवताओंका शिवजीसे ब्याहके लिये प्रार्थना करना, सप्तर्षियोंका पार्वतीके पास जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 106, 107
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।