बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मज्जन फल पेखिअ ततकाला। काक होहिं पिक बकउ मराला।।
मूल पाठ
मज्जन फल पेखिअ ततकाला। काक होहिं पिक बकउ मराला।।
सुनि आचरज करै जनि कोई। सतसंगति महिमा नहिं गोई।।
स्रोत अभिलेख 1.3 · पुस्तक पृ. 21, 23
भावार्थ
मूल पाठ के बादइस तीर्थराजमें स्नानका फल तत्काल ऐसा देखनेमें आता है कि कौए कोयल बन जाते हैं और बगुले हंस। यह सुनकर कोई आश्चर्य न करे, क्योंकि सत्संगकी महिमा छिपी नहीं है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 21 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मज्जन फल पेखिअ ततकाला। काक होहिं पिक बकउ मराला।।
English explanation
The fruit of bathing in the figurative pilgrimage-place of saintly fellowship appears immediately: crows become cuckoos, and even herons become swans.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मज्जन | स्नान का | of bathing |
| फल | फल | fruit; result |
| पेखिअ | देखा जाता है | is seen |
| ततकाला | तुरंत | immediately |
| काक | कौए | crows |
| होहिं | हो जाते हैं | become |
| पिक | कोयल | cuckoos |
| बकउ | बगुले भी | even herons |
| मराला | हंस | swans |
2 सुनि आचरज करै जनि कोई। सतसंगति महिमा नहिं गोई।।
English explanation
Let no one be astonished on hearing this; the greatness of good company is no secret.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| आचरज | आश्चर्य | astonishment |
| करै | करे | should feel |
| जनि | मत | do not |
| कोई | कोई | anyone |
| सतसंगति | सज्जनों की संगति की | of good company |
| महिमा | महिमा | greatness |
| नहिं | नहीं | not |
| गोई | छिपी हुई | hidden |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 21
- सहायक विषय
- ब्राह्मण-संत-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 21, 23
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।