बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बालमीक नारद घटजोनी। निज निज मुखनि कही निज होनी।।
मूल पाठ
बालमीक नारद घटजोनी। निज निज मुखनि कही निज होनी।।
जलचर थलचर नभचर नाना। जे जड़ चेतन जीव जहाना।।
स्रोत अभिलेख 1.3 · पुस्तक पृ. 21, 23
भावार्थ
मूल पाठ के बादवाल्मीकिजी, नारदजी और अगस्त्यजीने अपने-अपने मुखोंसे अपनी होनी(जीवनका वृत्तान्त) कही है। जलमें रहनेवाले, जमीनपर चलनेवाले और आकाशमें विचरनेवाले नाना प्रकारके जड़- चेतन जितने जीव इस जगत्में हैं,॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 22 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बालमीक नारद घटजोनी। निज निज मुखनि कही निज होनी।।
English explanation
Valmiki, Narada, and Agastya have each told, in their own words, what happened in their own lives.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बालमीक | ऋषि वाल्मीकि | the sage Valmiki |
| नारद | देवर्षि नारद | the divine sage Narada |
| घटजोनी | घड़े से उत्पन्न ऋषि अगस्त्य | Agastya, the jar-born sage |
| निज | अपने | their own |
| निज | अपने | each their own |
| मुखनि | मुखों से | from their mouths |
| कही | कही है | have recounted |
| निज | अपनी | their own |
| होनी | जीवन में घटी बात | life experience; what befell them |
2 जलचर थलचर नभचर नाना। जे जड़ चेतन जीव जहाना।।
English explanation
All the many kinds of water-dwelling, land-dwelling, and airborne beings in the world, whether insentient or sentient—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जलचर | जल में रहने वाले | water-dwelling beings |
| थलचर | स्थल पर रहने वाले | land-dwelling beings |
| नभचर | आकाश में विचरण करने वाले | airborne beings |
| नाना | अनेक प्रकार के | of many kinds |
| जे | जो | whoever; those that |
| जड़ | जड़; अचेतन | insentient |
| चेतन | चेतन | sentient |
| जीव | जीव; प्राणी | beings; creatures |
| जहाना | संसार में | in the world |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 22
- सहायक विषय
- ब्राह्मण-संत-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 21, 23
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।