बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मंगल सगुन सुगम सब ताकें। सगुन ब्रह्म सुंदर सुत जाकें।।
मूल पाठ
मंगल सगुन सुगम सब ताकें। सगुन ब्रह्म सुंदर सुत जाकें।।
राम सरिस बरु दुलहिनि सीता। समधी दसरथु जनकु पुनीता।।
स्रोत अभिलेख 1.304 · पुस्तक पृ. 286, 287
भावार्थ
मूल पाठ के बादस्वयं सगुण ब्रह्म जिसके सुन्दर पुत्र हैं, उसके लिये सब मङ्गल शकुन सुलभ हैं। जहाँ श्रीरामचन्द्रजी-सरीखे दूल्हा और सीताजी-जैसी दुलहिन हैं तथा दशरथजी और जनकजी-जैसे पवित्र समधी हैं,॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 286 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मंगल सगुन सुगम सब ताकें। सगुन ब्रह्म सुंदर सुत जाकें।।
English explanation
AI draft: All blessings and auspicious omens are readily available to him whose beautiful son is Brahman with attributes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंगल | मंगल, शुभ फल | blessings; auspicious outcomes |
| सगुन | शुभ शकुन | auspicious omens |
| सुगम | सहज सुलभ | readily attainable |
| सब | सभी | all |
| ताकें | उसके लिए | for him |
| सगुन | गुणों और रूप से युक्त | with attributes and form |
| ब्रह्म | परम सत्य, ब्रह्म | Brahman, the ultimate reality |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| सुत | पुत्र | son |
| जाकें | जिसके | whose |
2 राम सरिस बरु दुलहिनि सीता। समधी दसरथु जनकु पुनीता।।
English explanation
The groom is one such as Rama and the bride is Sita; the virtuous Dasharatha and Janaka are the fathers joined by this marriage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम, दशरथ के पुत्र | Rama, Dasharatha’s son |
| सरिस | जैसा | like; such as |
| बरु | वर, दूल्हा | bridegroom |
| दुलहिनि | दुलहिन, वधू | bride |
| सीता | सीता, जनक की पुत्री | Sita, Janaka’s daughter |
| समधी | विवाह से जुड़े वर-वधू के पिता | fathers of the couple, related by marriage |
| दसरथु | दशरथ, राम के पिता | Dasharatha, Rama’s father |
| जनकु | जनक, सीता के पिता | Janaka, Sita’s father |
| पुनीता | पवित्र, पुण्यवान | holy; virtuous |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.304
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 286
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 286, 287
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।