बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भूप बिलोकि लिए उर लाई। बैठै हरषि रजायसु पाई।।
मूल पाठ
भूप बिलोकि लिए उर लाई। बैठै हरषि रजायसु पाई।।
देखि रामु सब सभा जुड़ानी। लोचन लाभ अवधि अनुमानी।।
स्रोत अभिलेख 1.359 · पुस्तक पृ. 338, 339
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजाने देखते ही उन्हें हृदयसे लगा लिया। तदनन्तर वे आज्ञा पाकर हॢषत होकर बैठ गये। श्रीरामचन्द्रजीके दर्शनकर और नेत्रोंके लाभकी बस यही सीमा है, ऐसा अनुमानकर सारी सभा शीतल हो गयी (अर्थात् सबके तीनों प्रकारके ताप सदाके लिये मिट गये)॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 338 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 भूप बिलोकि लिए उर लाई। बैठै हरषि रजायसु पाई।।
English explanation
AI-generated meaning draft: Seeing them, the king embraced them. Receiving the king’s permission, they sat down joyfully.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूप | राजा दशरथ ने | King Dasharatha |
| बिलोकि | देखकर | on seeing |
| लिए | ले लिया | took them |
| उर | हृदय से | to his heart |
| लाई | लगाकर | drawing them close |
| बैठै | बैठ गए | sat down |
| हरषि | प्रसन्न होकर | joyfully |
| रजायसु | राजा की आज्ञा | the king’s permission |
| पाई | पाकर | having received |
2 देखि रामु सब सभा जुड़ानी। लोचन लाभ अवधि अनुमानी।।
English explanation
Seeing Rama, the entire assembly felt soothed with joy, considering this the highest fulfillment of their eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | seeing |
| रामु | राम को | Rama |
| सब | सारी | the entire |
| सभा | सभा | assembly |
| जुड़ानी | आनंद से शीतल हुई | was joyfully soothed |
| लोचन | नेत्रों के | of the eyes |
| लाभ | लाभ की | fulfillment |
| अवधि | पराकाष्ठा | highest limit |
| अनुमानी | मान लिया | considered it |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.359
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 338
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 338, 339
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।