बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भुज बिसाल भूषन जुत भूरी। हियँ हरि नख अति सोभा रूरी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दबहुत-से आभूषणोंसे सुशोभित विशाल भुजाएँ हैं। हृदयपर बाघके नखकी बहुत ही निराली छटा है। छातीपर रत्नोंसे युक्त मणियोंके हारकी शोभा और ब्राह्मण (भृगु) के चरणचिह्नको देखते ही मन लुभा जाता है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 198 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भुज बिसाल भूषन जुत भूरी। हियँ हरि नख अति सोभा रूरी।।
उर मनिहार पदिक की सोभा। बिप्र चरन देखत मन लोभा।।
स्रोत अभिलेख 1.199 · पुस्तक पृ. 198, 199
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भुज बिसाल भूषन जुत भूरी। हियँ हरि नख अति सोभा रूरी।।
English explanation
His large arms bear many ornaments; a lion-claw ornament on his chest gives an especially lovely appearance.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भुज | भुजाएँ | arms |
| बिसाल | बड़ी और सुदीर्घ | large and long |
| भूषन | आभूषणों से | with ornaments |
| जुत | युक्त | adorned |
| भूरी | बहुत-से | many |
| हियँ | छाती पर | on the chest |
| हरि | सिंह के | of a lion |
| नख | नखों का आभूषण | claw ornament |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| सोभा | शोभा | beauty |
| रूरी | सुंदर | lovely |
2 उर मनिहार पदिक की सोभा। बिप्र चरन देखत मन लोभा।।
English explanation
A jeweled necklace and pendant adorn his chest; the mark of a Brahmin's foot captivates the beholder's heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उर | छाती पर | on the chest |
| मनिहार | मणियों का हार | a jeweled necklace |
| पदिक | हार का पदक या लटकन | a necklace medallion or pendant |
| की | की | of |
| सोभा | शोभा | splendor |
| बिप्र | ब्राह्मण के | of the Brahmin |
| चरन | चरण का चिह्न | foot-mark |
| देखत | देखकर | on seeing |
| मन | मन | the heart |
| लोभा | लुभा जाता है | is captivated |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.199
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 198
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 198, 199
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