बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भाइहि भाइहि परम समीती। सकल दोष छल बरजित प्रीती।।
मूल पाठ
भाइहि भाइहि परम समीती। सकल दोष छल बरजित प्रीती।।
जेठे सुतहि राज नृप दीन्हा। हरि हित आपु गवन बन कीन्हा।।
स्रोत अभिलेख 1.153 · पुस्तक पृ. 159, 159
भावार्थ
मूल पाठ के बादभाई-भाईमें बड़ा मेल और सब प्रकारके दोषों और छलोंसे रहित [सच्ची] प्रीति थी। राजाने जेठे पुत्रको राज्य दे दिया और आप भगवान् [के भजन] के लिये वनको चल दिया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 159 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भाइहि भाइहि परम समीती। सकल दोष छल बरजित प्रीती।।
English explanation
The two brothers shared profound harmony; their love was free from every fault and deceit.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भाइहि | एक भाई का | one brother’s |
| भाइहि | दूसरे भाई से | with the other brother |
| परम | अत्यंत | profound |
| समीती | मेल; सौहार्द | harmony; accord |
| सकल | सभी | all |
| दोष | दोषों से | faults |
| छल | छल से | deceit |
| बरजित | रहित | free from |
| प्रीती | प्रेम | love |
2 जेठे सुतहि राज नृप दीन्हा। हरि हित आपु गवन बन कीन्हा।।
English explanation
The king gave the kingdom to his elder son and himself departed for the forest for devotion to Hari.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेठे | बड़े | elder |
| सुतहि | पुत्र को | to the son |
| राज | राज्य | the kingdom |
| नृप | राजा ने | the king |
| दीन्हा | दिया | gave |
| हरि | भगवान हरि की | to Hari, the Lord |
| हित | भक्ति के लिए | for devotion |
| आपु | स्वयं | himself |
| गवन | प्रस्थान | departure |
| बन | वन को | to the forest |
| कीन्हा | किया | made |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.153
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 159
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 159, 159
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