बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भाँति अनेक संभु समुझावा। भावी बस न ग्यानु उर आवा।।
मूल पाठ
भाँति अनेक संभु समुझावा। भावी बस न ग्यानु उर आवा।।
कह प्रभु जाहु जो बिनहिं बोलाएँ। नहिं भलि बात हमारे भाएँ।।
स्रोत अभिलेख 1.62 · पुस्तक पृ. 81, 82
भावार्थ
मूल पाठ के बादशिवजीने बहुत प्रकारसे समझाया, पर होनहारवश सतीके हृदयमें बोध नहीं हुआ। फिर शिवजीने कहा कि यदि बिना बुलाये जाओगी, तो हमारी समझमें अच्छी बात न होगी॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 82 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1भाँति अनेक संभु समुझावा। भावी बस न ग्यानु उर आवा।।
English explanation
Shiva explained in many ways, but under the sway of what was destined, understanding did not enter Sati’s heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भाँति | प्रकार से | in ways |
| अनेक | अनेक | many |
| संभु | शंभु, शिव | Shambhu, Shiva |
| समुझावा | समझाया | explained; counseled |
| भावी | होनी; होने वाली नियत घटना | what was destined to happen |
| बस | के वश में | under the sway of |
| न | नहीं | not |
| ग्यानु | समझ; विवेक | understanding; discernment |
| उर | हृदय में | into the heart |
| आवा | आया | came |
2 कह प्रभु जाहु जो बिनहिं बोलाएँ। नहिं भलि बात हमारे भाएँ।।
English explanation
Shiva said, ‘If you go without being invited, that is not a good thing in my view.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहा | said |
| प्रभु | प्रभु शिव | Lord Shiva |
| जाहु | तुम जाओ | you go |
| जो | यदि | if |
| बिनहिं | बिना ही | without |
| बोलाएँ | बुलाए जाने के | being invited |
| नहिं | नहीं | not |
| भलि | अच्छी | good |
| बात | बात | a thing; a course of action |
| हमारे | मेरे | my |
| भाएँ | विचार में | in the view of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.62
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 82
- सहायक विषय
- शिवजीद्वारा सतीका त्याग, शिवजीकी समाधि
- मुद्रित पृष्ठ
- 81, 82
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।