बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भलेहिं नाथ आयसु धरि सीसा। बाँधि तुरग तरु बैठ महीसा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे नाथ! बहुत अच्छा, ऐसा कहकर और उसकी आज्ञा सिर चढ़ाकर, घोड़ेको वृक्षसे बाँधकर राजा बैठ गया। राजाने उसकी बहुत प्रकारसे प्रशंसा की और उसके चरणोंकी वन्दना करके अपने भाग्यकी सराहना की॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 164 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भलेहिं नाथ आयसु धरि सीसा। बाँधि तुरग तरु बैठ महीसा।।
नृप बहु भाँती प्रसंसेउ ताही। चरन बंदी निज भाग्य सराही।।
स्रोत अभिलेख 1.16 · पुस्तक पृ. 164, 165
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 भलेहिं नाथ आयसु धरि सीसा। बाँधि तुरग तरु बैठ महीसा।।
English explanation
AI draft: Saying, “Very well, lord,” the king respectfully accepted the instruction, tied his horse to a tree, and sat down.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भलेहिं | अच्छा; जैसी आज्ञा | very well; as you command |
| नाथ | हे स्वामी | O lord |
| आयसु | आज्ञा | instruction |
| धरि | रखकर; स्वीकार करके | placing; accepting |
| सीसा | सिर पर | on his head |
| बाँधि | बाँधकर | having tied |
| तुरग | घोड़ा | horse |
| तरु | पेड़ से | to a tree |
| बैठ | बैठ गया | sat down |
| महीसा | राजा | the king |
2नृप बहु भाँती प्रसंसेउ ताही। चरन बंदी निज भाग्य सराही।।
English explanation
The king praised him in many ways, bowed at his feet, and praised his own good fortune.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नृप | राजा | the king |
| बहु | बहुत; अनेक | many |
| भाँती | प्रकार से | in ways |
| प्रसंसेउ | प्रशंसा की | praised |
| ताही | उसकी; उस साधुवेषधारी की | him, the man disguised as an ascetic |
| चरन | चरणों की | at his feet |
| बंदी | वंदना करके | having bowed in reverence |
| निज | अपने | his own |
| भाग्य | भाग्य को | good fortune |
| सराही | सराहा | praised |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.16
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 164
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 164, 165
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।