बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भरद्वाज मुनि बसहिं प्रयागा। तिन्हहि राम पद अति अनुरागा।।
मूल पाठ
भरद्वाज मुनि बसहिं प्रयागा। तिन्हहि राम पद अति अनुरागा।।
तापस सम दम दया निधाना। परमारथ पथ परम सुजाना।।
स्रोत अभिलेख 1.44 · पुस्तक पृ. 66, 67
भावार्थ
मूल पाठ के बादभरद्वाज मुनि प्रयागमें बसते हैं, उनका श्रीरामजीके चरणोंमें अत्यन्त प्रेम है। वे तपस्वी, निगृहीतचित्त, जितेन्द्रिय, दयाके निधान और परमार्थके मार्गमें बड़े ही चतुर हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 66 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भरद्वाज मुनि बसहिं प्रयागा। तिन्हहि राम पद अति अनुरागा।।
English explanation
AI-generated draft interpretation: Sage Bharadvaja lives at Prayag. He has deep love for Rama’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरद्वाज | ऋषि भरद्वाज | Bharadvaja, the sage |
| मुनि | ऋषि | sage |
| बसहिं | रहते हैं | dwells |
| प्रयागा | प्रयाग में | at Prayag |
| तिन्हहि | उन्हें | to him |
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| पद | चरणों में | at the feet |
| अति | अत्यंत | very deep |
| अनुरागा | प्रेम है | love |
2 तापस सम दम दया निधाना। परमारथ पथ परम सुजाना।।
English explanation
He is an ascetic, a treasury of mental restraint, sense-control, and compassion, and deeply versed in the path of spiritual fulfillment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तापस | तपस्वी | ascetic |
| सम | मन का संयम | restraint of the mind |
| दम | इंद्रियों का संयम | control of the senses |
| दया | करुणा | compassion |
| निधाना | भंडार | treasury |
| परमारथ | परम आध्यात्मिक हित का | of spiritual fulfillment |
| पथ | मार्ग | path |
| परम | अत्यंत | supremely |
| सुजाना | भलीभाँति जानने वाले | knowledgeable |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.44
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 66
- सहायक विषय
- याज्ञवल्क्य-भरद्वाज-संवाद तथा प्रयाग-माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 66, 67
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।