बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बृंद बृंद मिलि चलीं लोगाई। सहज संगार किएँ उठि धाई।।
मूल पाठ
बृंद बृंद मिलि चलीं लोगाई। सहज संगार किएँ उठि धाई।।
कनक कलस मंगल धरि थारा। गावत पैठहिं भूप दुआरा।।
स्रोत अभिलेख 1.194 · पुस्तक पृ. 194, 195
भावार्थ
मूल पाठ के बादस्त्रियाँ झुंड-की-झुंड मिलकर चलीं। स्वाभाविक शृंगार किये ही वे उठ दौड़ीं। सोनेका कलश लेकर और थालोंमें मङ्गल द्रव्य भरकर गाती हुई राजद्वारमें प्रवेश करती हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 194 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बृंद बृंद मिलि चलीं लोगाई। सहज संगार किएँ उठि धाई।।
English explanation
Women gathered and set out in groups. Simply adorned, they rose and hurried forth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बृंद | समूह | group |
| बृंद | समूह | after group |
| मिलि | मिलकर | gathering together |
| चलीं | चल पड़ीं | set out |
| लोगाई | स्त्रियाँ | women |
| सहज | सहज; साधारण | simple; natural |
| संगार | श्रृंगार | adornment |
| किएँ | किए हुए | having done |
| उठि | उठकर | rising |
| धाई | दौड़ पड़ीं | hurried forth |
2 कनक कलस मंगल धरि थारा। गावत पैठहिं भूप दुआरा।।
English explanation
Carrying golden pitchers and trays of auspicious offerings, the women enter the king’s doorway singing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कनक | सोने के | golden |
| कलस | कलश | ceremonial pitchers |
| मंगल | मंगल-सामग्री के | of auspicious offerings |
| धरि | लेकर | carrying |
| थारा | थाल | trays |
| गावत | गाते हुए | singing |
| पैठहिं | प्रवेश करती हैं | enter |
| भूप | राजा के | the king’s |
| दुआरा | द्वार में | doorway |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.194
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 194
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 194, 195
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।