बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ध्वज पताक तोरन पुर छावा। कहि न जाइ जेहि भाँति बनावा।।
मूल पाठ
ध्वज पताक तोरन पुर छावा। कहि न जाइ जेहि भाँति बनावा।।
सुमनबृष्टि अकास तें होई। ब्रह्मानंद मगन सब लोई।।
स्रोत अभिलेख 1.194 · पुस्तक पृ. 194, 195
भावार्थ
मूल पाठ के बादध्वजा, पताका और तोरणोंसे नगर छा गया। जिस प्रकारसे वह सजाया गया, उसका तो वर्णन ही नहीं हो सकता। आकाशसे फूलोंकी वर्षा हो रही है, सब लोग ब्रह्मानन्दमें मग्र हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 194 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 ध्वज पताक तोरन पुर छावा। कहि न जाइ जेहि भाँति बनावा।।
English explanation
AI-generated draft interpretation: The city was covered with flags, banners, and ornamental festoons. The manner in which it was decorated cannot be described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ध्वज | ध्वजों से | with flags |
| पताक | पताकाओं से | with banners |
| तोरन | तोरणों से | with ornamental festoons |
| पुर | नगर | the city |
| छावा | छा गया; ढक गया | was covered |
| कहि | कहा; वर्णन किया | described |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकता | can be |
| जेहि | जिस | in which |
| भाँति | प्रकार | manner |
| बनावा | सजाया गया | was decorated |
2 सुमनबृष्टि अकास तें होई। ब्रह्मानंद मगन सब लोई।।
English explanation
Flowers rained down from the sky. All the people were immersed in divine bliss.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुमनबृष्टि | फूलों की वर्षा | a shower of flowers |
| अकास | आकाश | the sky |
| तें | से | from |
| होई | हुई | occurred |
| ब्रह्मानंद | ब्रह्म के आनंद में | in the bliss of Brahman |
| मगन | मग्न | immersed |
| सब | सभी | all |
| लोई | लोग | people |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.194
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 194
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 194, 195
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।