बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिहसे अपर भूप सुनि बानी। जे अबिबेक अंध अभिमानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्ददूसरे राजा, जो अविवेकसे अंधे हो रहे थे और अभिमानी थे, यह बात सुनकर बहुत हँसे। [उन्होंने कहा—] धनुष तोडऩेपर भी विवाह होना कठिन है (अर्थात् सहजहीमें हम जानकीको हाथसे जाने नहीं देंगे), फिर बिना तोड़े तो राजकुमारीको ब्याह ही कौन सकता है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 238 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बिहसे अपर भूप सुनि बानी। जे अबिबेक अंध अभिमानी।।
तोरेहुँ धनुषु ब्याहु अवगाहा। बिनु तोरें को कुअँरि बिआहा।।
स्रोत अभिलेख 1.245 · पुस्तक पृ. 238, 239
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बिहसे अपर भूप सुनि बानी। जे अबिबेक अंध अभिमानी।।
English explanation
Hearing these words, other kings laughed—those blinded by lack of discernment and filled with pride.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिहसे | हँसे | laughed |
| अपर | दूसरे | other |
| भूप | राजा | kings |
| सुनि | सुनकर | hearing |
| बानी | बात; वचन | words |
| जे | जो | who |
| अबिबेक | विवेकहीनता से | by lack of discernment |
| अंध | अंधे | blinded |
| अभिमानी | अभिमानी | proud |
2 तोरेहुँ धनुषु ब्याहु अवगाहा। बिनु तोरें को कुअँरि बिआहा।।
English explanation
Even after breaking the bow, marriage is difficult; who could marry the princess without breaking it?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तोरेहुँ | तोड़ने पर भी | even after breaking |
| धनुषु | धनुष | the bow |
| ब्याहु | विवाह | marriage |
| अवगाहा | कठिन; दुष्कर | difficult |
| बिनु | बिना | without |
| तोरें | तोड़े | breaking |
| को | कौन | who |
| कुअँरि | राजकुमारी सीता से | Princess Sita |
| बिआहा | विवाह करे | could marry |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.245
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 238
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका यज्ञशालामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 238, 239
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।