बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महा भटमानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दलक्ष्मणजी हँसकर कोमल वाणीसे बोले—अहो, मुनीश्वर तो अपनेको बड़ा भारी योद्धा समझते हैं। बार-बार मुझे कुल्हाड़ी दिखाते हैं। फूँकसे पहाड़ उड़ाना चाहते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 262 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महा भटमानी।।
पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारू। चहत उड़ावन फूँकि पहारू।।
स्रोत अभिलेख 1.273 · पुस्तक पृ. 262, 262
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महा भटमानी।।
English explanation
AI-generated draft: Smiling, Lakshmana spoke gently: “Ah, eminent sage! You consider yourself a very great warrior!”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिहसि | हँसकर | smiling |
| लखनु | लक्ष्मण, राम के छोटे भाई | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| बोले | बोले | said |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी | speech |
| अहो | अहो! वाह! | ah! indeed! |
| मुनीसु | हे मुनिश्रेष्ठ, परशुराम! | O eminent sage, Parashurama! |
| महा | बहुत बड़ा | very great |
| भटमानी | अपने को योद्धा मानने वाले | one who prides himself on being a warrior |
2 पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारू। चहत उड़ावन फूँकि पहारू।।
English explanation
You repeatedly show me your axe, as though wishing to blow away a mountain with a puff of breath.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| मोहि | मुझे | to me |
| देखाव | आप दिखाते हैं | you show |
| कुठारू | फरसा | battle-axe |
| चहत | आप चाहते हैं | you wish |
| उड़ावन | उड़ा देना | to blow away |
| फूँकि | फूँक मारकर | by blowing |
| पहारू | पहाड़ | a mountain |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.273
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 262
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 262, 262
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।