बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिस्व बिजय जसु जानकि पाई। आए भवन ब्याहि सब भाई।।
मूल पाठ
बिस्व बिजय जसु जानकि पाई। आए भवन ब्याहि सब भाई।।
सकल अमानुष करम तुम्हारे। केवल कौसिक कृपाँ सुधारे।।
स्रोत अभिलेख 1.357 · पुस्तक पृ. 337, 337
भावार्थ
मूल पाठ के बादविश्वविजयके यश और जानकीको पाया और सब भाइयोंको ब्याहकर घर आये। तुम्हारे सभी कर्म अमानुषी हैं (मनुष्यकी शक्तिके बाहर हैं), जिन्हें केवल विश्वामित्रजीकी कृपाने सुधारा है (सम्पन्न किया है)॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 337 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बिस्व बिजय जसु जानकि पाई। आए भवन ब्याहि सब भाई।।
English explanation
You gained the fame of conquering the world and obtained Janaki as your bride; all the brothers returned home after marrying.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिस्व | विश्व की | of the world |
| बिजय | विजय का | of conquest |
| जसु | यश | fame |
| जानकि | जनक की पुत्री सीता को | Janaka’s daughter Sita |
| पाई | प्राप्त किया | obtained |
| आए | लौट आए | returned |
| भवन | घर | home |
| ब्याहि | विवाह करके | having married |
| सब | सभी | all |
| भाई | भाई | the brothers |
2 सकल अमानुष करम तुम्हारे। केवल कौसिक कृपाँ सुधारे।।
English explanation
All these deeds of yours surpass human ability; they were accomplished solely through Vishvamitra’s grace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकल | सभी | all |
| अमानुष | मानवीय सामर्थ्य से परे | beyond human ability |
| करम | कार्य | deeds |
| तुम्हारे | तुम्हारे | your |
| केवल | केवल | solely |
| कौसिक | विश्वामित्र की | of Vishvamitra |
| कृपाँ | कृपा से | through grace |
| सुधारे | सफल हुए | were successfully accomplished |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.357
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 337
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 337, 337
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।