बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिस्वनाथ मम नाथ पुरारी। त्रिभुवन महिमा बिदित तुम्हारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[पार्वतीजीने कहा—] हे संसारके स्वामी! हे मेरे नाथ! हे त्रिपुरासुरका वध करनेवाले! आपकी महिमा तीनों लोकोंमें विख्यात है। चर, अचर, नाग, मनुष्य और देवता सभी आपके चरणकमलोंकी सेवा करते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 121 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बिस्वनाथ मम नाथ पुरारी। त्रिभुवन महिमा बिदित तुम्हारी।।
चर अरु अचर नाग नर देवा। सकल करहिं पद पंकज सेवा।।
स्रोत अभिलेख 1.107 · पुस्तक पृ. 121, 121
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बिस्वनाथ मम नाथ पुरारी। त्रिभुवन महिमा बिदित तुम्हारी।।
English explanation
O Lord of the universe, my lord, Shiva, foe of Tripura! Your glory is known throughout the three worlds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिस्वनाथ | हे विश्व के स्वामी | O Lord of the universe |
| मम | मेरे | my |
| नाथ | स्वामी | lord |
| पुरारी | त्रिपुर के शत्रु शिव | Shiva, foe of Tripura |
| त्रिभुवन | तीनों लोकों में | in the three worlds |
| महिमा | महिमा | glory |
| बिदित | प्रसिद्ध है | is known |
| तुम्हारी | आपकी | your |
2 चर अरु अचर नाग नर देवा। सकल करहिं पद पंकज सेवा।।
English explanation
Moving and unmoving beings, serpents, humans, and gods—all serve your lotus-like feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चर | चलने-फिरने वाले जीव | moving beings |
| अरु | और | and |
| अचर | अचल प्राणी या सत्ताएँ | unmoving beings |
| नाग | नाग, सर्पजाति के प्राणी | serpent beings |
| नर | मनुष्य | humans |
| देवा | देवता | gods |
| सकल | सभी | all |
| करहिं | करते हैं | perform |
| पद | चरणों की | feet |
| पंकज | कमल-सदृश | lotus-like |
| सेवा | सेवा | service |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.107
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 121
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 121, 121
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।