बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिरह बिकल नर इव रघुराई। खोजत बिपिन फिरत दोउ भाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरघुनाथजी मनुष्योंकी भाँति विरहसे व्याकुल हैं और दोनों भाई वनमें सीताको खोजते हुए फिर रहे हैं। जिनके कभी कोई संयोग-वियोग नहीं है, उनमें प्रत्यक्ष विरहका दु:ख देखा गया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 71 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बिरह बिकल नर इव रघुराई। खोजत बिपिन फिरत दोउ भाई।।
कबहूँ जोग बियोग न जाकें। देखा प्रगट बिरह दुख ताकें।।
स्रोत अभिलेख 1.49 · पुस्तक पृ. 70, 71
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बिरह बिकल नर इव रघुराई। खोजत बिपिन फिरत दोउ भाई।।
English explanation
Rama, lord of Raghu’s line, was distraught with separation like a human being. Both brothers wandered through the forest searching for Sita.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिरह | विरह से | by separation |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| नर | मनुष्य | a human being |
| इव | की तरह | like |
| रघुराई | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s line |
| खोजत | सीता को खोजते हुए | searching for Sita |
| बिपिन | वन में | in the forest |
| फिरत | घूमते थे | wandered |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई, राम और लक्ष्मण | brothers, Rama and Lakshmana |
2 कबहूँ जोग बियोग न जाकें। देखा प्रगट बिरह दुख ताकें।।
English explanation
In the very one who never undergoes union or separation, the sorrow of separation was visibly seen.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कबहूँ | कभी भी | ever |
| जोग | संयोग; मिलन | union; coming together |
| बियोग | वियोग; बिछोह | separation |
| न | नहीं होता | does not occur |
| जाकें | जिन्हें; जिनमें | in whom |
| देखा | देखा गया | was seen |
| प्रगट | प्रत्यक्ष रूप में | visibly manifested |
| बिरह | विरह का | of separation |
| दुख | दुःख | sorrow |
| ताकें | उन्हीं में | in that very one |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.49
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 71
- सहायक विषय
- याज्ञवल्क्य-भरद्वाज-संवाद तथा प्रयाग-माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 70, 71
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।