बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिबिध भाँति होइहि पहुनाई। प्रिय न काहि अस सासुर माई।।
मूल पाठ
बिबिध भाँति होइहि पहुनाई। प्रिय न काहि अस सासुर माई।।
तब तब राम लखनहि निहारी। होइहहिं सब पुर लोग सुखारी।।
स्रोत अभिलेख 1.311 · पुस्तक पृ. 292, 292
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब उनकी अनेकों प्रकारसे पहुनाई होगी। सखी! ऐसी ससुराल किसे प्यारी न होगी! तब- तब हम सब नगरनिवासी श्रीराम-लक्ष्मणको देख-देखकर सुखी होंगे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 292 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बिबिध भाँति होइहि पहुनाई। प्रिय न काहि अस सासुर माई।।
English explanation
There will be hospitality of many kinds. Dear friend, who would not love such an in-laws’ home?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिबिध | अनेक प्रकार की | various |
| भाँति | रीति से | in ways |
| होइहि | होगा | will take place |
| पहुनाई | अतिथि-सत्कार | hospitality |
| प्रिय | प्यारा | dear |
| न | नहीं | not |
| काहि | किसे | to whom |
| अस | ऐसा | such |
| सासुर | ससुराल | in-laws’ home |
| माई | हे सखी | dear friend |
2 तब तब राम लखनहि निहारी। होइहहिं सब पुर लोग सुखारी।।
English explanation
Then, each time they see Rama and Lakshmana, all the townspeople will rejoice.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| तब | हर बार | each time |
| राम | राम को | Rama |
| लखनहि | लक्ष्मण को | Lakshmana, Rama’s brother |
| निहारी | देखकर | on seeing |
| होइहहिं | होंगे | will become |
| सब | सभी | all |
| पुर | नगर के | of the town |
| लोग | लोग | people |
| सुखारी | सुखी | happy |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.311
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 292
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 292, 292
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।