बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिनु सतसंग बिबेक न होई। राम कृपा बिनु सुलभ न सोई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसत्संगके बिना विवेक नहीं होता और श्रीरामजीकी कृपाके बिना वह सत्संग सहजमें मिलता नहीं। सत्संगति आनन्द और कल्याणकी जड़ है। सत्संगकी सिद्धि (प्राप्ति) ही फल है और सब साधन तो फूल हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 22 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बिनु सतसंग बिबेक न होई। राम कृपा बिनु सुलभ न सोई।।
सतसंगत मुद मंगल मूला। सोइ फल सिधि सब साधन फूला।।
स्रोत अभिलेख 1.3 · पुस्तक पृ. 21, 23
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बिनु सतसंग बिबेक न होई। राम कृपा बिनु सुलभ न सोई।।
English explanation
Without good company, discernment does not arise; without Rama’s grace, that company is not easily obtained.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिनु | बिना | without |
| सतसंग | सज्जनों की संगति | good company |
| बिबेक | उचित-अनुचित का विवेक | discernment of right and wrong |
| न | नहीं | not |
| होई | होता है | arises |
| राम | भगवान राम की | of Lord Rama |
| कृपा | कृपा | grace |
| बिनु | बिना | without |
| सुलभ | सहज प्राप्त | easily attainable |
| न | नहीं | not |
| सोई | वह सत्संग | that good company |
2 सतसंगत मुद मंगल मूला। सोइ फल सिधि सब साधन फूला।।
English explanation
Good company is the root of joy and well-being. It is the fruit-like fulfillment; all spiritual practices are flowers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सतसंगत | सज्जनों की संगति | good company |
| मुद | आनंद | joy |
| मंगल | कल्याण | well-being; auspiciousness |
| मूला | मूल; स्रोत | root; source |
| सोइ | वही सत्संग | that very good company |
| फल | फल | fruit |
| सिधि | सिद्धि; पूर्ण उपलब्धि | fulfillment; attainment |
| सब | सभी | all |
| साधन | साधन; अभ्यास | spiritual means or practices |
| फूला | फूल | flowers |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 22
- सहायक विषय
- ब्राह्मण-संत-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 21, 23
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।