बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिनु पद चलइ सुनइ बिनु काना। कर बिनु करम करइ बिधि नाना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवह (ब्रह्म) बिना ही पैरके चलता है, बिना ही कानके सुनता है, बिना ही हाथके नाना प्रकारके काम करता है, बिना मुँह (जिह्वा) के ही सारे (छहों) रसोंका आनन्द लेता है और बिना ही वाणीके बहुत योग्य वक्ता है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 130 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बिनु पद चलइ सुनइ बिनु काना। कर बिनु करम करइ बिधि नाना।।
आनन रहित सकल रस भोगी। बिनु बानी बकता बड़ जोगी।।
स्रोत अभिलेख 1.118 · पुस्तक पृ. 130, 130
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बिनु पद चलइ सुनइ बिनु काना। कर बिनु करम करइ बिधि नाना।।
English explanation
He walks without feet and hears without ears; without hands he performs actions of many kinds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिनु | बिना | without |
| पद | पैरों के | feet |
| चलइ | चलते हैं | walks |
| सुनइ | सुनते हैं | hears |
| बिनु | बिना | without |
| काना | कानों के | ears |
| कर | हाथों के | hands |
| बिनु | बिना | without |
| करम | कर्म; कार्य | actions |
| करइ | करते हैं | performs |
| बिधि | प्रकार के | of kinds |
| नाना | अनेक | many |
2 आनन रहित सकल रस भोगी। बिनु बानी बकता बड़ जोगी।।
English explanation
Without a mouth he enjoys all tastes; speaking without a voice, he is a great yogi.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आनन | मुख | a mouth |
| रहित | से रहित | without |
| सकल | सभी | all |
| रस | रसों; स्वादों का | tastes |
| भोगी | आस्वादन करने वाले | one who enjoys |
| बिनु | बिना | without |
| बानी | वाणी के | voice or speech |
| बकता | बोलने वाले | one who speaks |
| बड़ | महान | great |
| जोगी | योगी | yogi; master of yoga |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.118
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 130
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 130, 130
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।