बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तनु बिनु परस नयन बिनु देखा। ग्रहइ घ्रान बिनु बास असेषा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवह बिना ही शरीर (त्वचा) के स्पर्श करता है, बिना ही आँखोंके देखता है और बिना ही नाकके सब गन्धोंको ग्रहण करता है (सूँघता है)। उस ब्रह्मकी करनी सभी प्रकारसे ऐसी अलौकिक है कि जिसकी महिमा कही नहीं जा सकती॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 130 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तनु बिनु परस नयन बिनु देखा। ग्रहइ घ्रान बिनु बास असेषा।।
असि सब भाँति अलौकिक करनी। महिमा जासु जाइ नहिं बरनी।।
स्रोत अभिलेख 1.118 · पुस्तक पृ. 130, 130
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तनु बिनु परस नयन बिनु देखा। ग्रहइ घ्रान बिनु बास असेषा।।
English explanation
He touches without a body, sees without eyes, and perceives every scent without a nose.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तनु | शरीर के | a body |
| बिनु | बिना | without |
| परस | स्पर्श करते हैं | touches |
| नयन | आँखों के | eyes |
| बिनु | बिना | without |
| देखा | देखते हैं | sees |
| ग्रहइ | ग्रहण करते हैं | perceives |
| घ्रान | नाक; घ्राणेंद्रिय के | a nose; the organ of smell |
| बिनु | बिना | without |
| बास | गंध | scents |
| असेषा | सभी, बिना किसी शेष के | all, without exception |
2 असि सब भाँति अलौकिक करनी। महिमा जासु जाइ नहिं बरनी।।
English explanation
Such are his deeds, extraordinary in every way; his greatness cannot be described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| असि | ऐसी | such |
| सब | सभी | every |
| भाँति | प्रकार से | in respect |
| अलौकिक | लोक की साधारण रीति से परे | beyond ordinary worldly ways |
| करनी | करनी; कार्य | deeds |
| महिमा | महिमा | greatness |
| जासु | जिनकी | whose |
| जाइ | जा सकती है | can be |
| नहिं | नहीं | not |
| बरनी | वर्णित | described |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.118
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 130
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 130, 130
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।