बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिधि हरि हर कबि कोबिद बानी। कहत साधु महिमा सकुचानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दब्रह्मा, विष्णु, शिव, कवि और पण्डितोंकी वाणी भी संत-महिमाका वर्णन करनेमें सकुचाती है; वह मुझसे किस प्रकार नहीं कही जाती, जैसे साग-तरकारी बेचनेवालेसे मणियोंके गुणसमूह नहीं कहे जा सकते॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 22 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बिधि हरि हर कबि कोबिद बानी। कहत साधु महिमा सकुचानी।।
सो मो सन कहि जात न कैसें। साक बनिक मनि गुन गन जैसें।।
स्रोत अभिलेख 1.3 · पुस्तक पृ. 21, 23
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बिधि हरि हर कबि कोबिद बानी। कहत साधु महिमा सकुचानी।।
English explanation
Even the speech of Brahma, Vishnu, Shiva, poets, and scholars falters in describing the greatness of saints.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिधि | सृष्टिकर्ता ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| हरि | भगवान विष्णु | Lord Vishnu |
| हर | भगवान शिव | Lord Shiva |
| कबि | कवियों की | of poets |
| कोबिद | विद्वानों की | of scholars |
| बानी | वाणी | speech |
| कहत | कहते हुए | while describing |
| साधु | संतों की | of saints |
| महिमा | महिमा | greatness |
| सकुचानी | संकोच करती है | hesitates; feels inadequate |
2 सो मो सन कहि जात न कैसें। साक बनिक मनि गुन गन जैसें।।
English explanation
I cannot describe that greatness in any way; my attempt is like a vegetable seller trying to enumerate a jewel’s qualities.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह महिमा | that greatness |
| मो | मुझ | me |
| सन | से | by |
| कहि | कही | expressed |
| जात | जा सकती | can be |
| न | नहीं | not |
| कैसें | किसी तरह | in any way |
| साक | साग; सब्जी | vegetables |
| बनिक | बेचने वाला व्यापारी | seller; merchant |
| मनि | मणि के | of a jewel |
| गुन | गुण | qualities |
| गन | गिने; वर्णन करे | enumerates; describes |
| जैसें | जैसे | just as |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 22
- सहायक विषय
- ब्राह्मण-संत-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 21, 23
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।