बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिदुषन्ह प्रभु बिराटमय दीसा। बहु मुख कर पग लोचन सीसा।।
मूल पाठ
बिदुषन्ह प्रभु बिराटमय दीसा। बहु मुख कर पग लोचन सीसा।।
जनक जाति अवलोकहिं कैसैं। सजन सगे प्रिय लागहिं जैसें।।
स्रोत अभिलेख 1.242 · पुस्तक पृ. 235, 236
भावार्थ
मूल पाठ के बादविद्वानोंको प्रभु विराट्रूपमें दिखायी दिये, जिसके बहुत-से मुँह, हाथ, पैर, नेत्र और सिर हैं। जनकजीके सजातीय (कुटुम्बी) प्रभुको किस तरह (कैसे प्रिय रूपमें) देख रहे हैं, जैसे सगे सजन (सम्बन्धी) प्रिय लगते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 235 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बिदुषन्ह प्रभु बिराटमय दीसा। बहु मुख कर पग लोचन सीसा।।
English explanation
To the learned, the Lord appeared in the cosmic form, with many mouths, hands, feet, eyes, and heads.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिदुषन्ह | विद्वानों को | to the learned |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| बिराटमय | विराट विश्वरूप से युक्त | embodying the cosmic form |
| दीसा | दिखाई दिए | appeared |
| बहु | अनेक | many |
| मुख | मुख | mouths |
| कर | हाथ | hands |
| पग | पैर | feet |
| लोचन | नेत्र | eyes |
| सीसा | सिर | heads |
2 जनक जाति अवलोकहिं कैसैं। सजन सगे प्रिय लागहिं जैसें।।
English explanation
How do the people of Janaka’s clan see them? As dear members of their own family.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनक | राजा जनक के | of King Janaka |
| जाति | कुल के लोग | clan members |
| अवलोकहिं | देखते हैं | behold |
| कैसैं | कैसे | how |
| सजन | संबंधी | kinsfolk |
| सगे | सगे | closely related |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| लागहिं | लगते हैं | seem |
| जैसें | जैसे | as |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.242
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 235
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका यज्ञशालामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 235, 236
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।