बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बालचरित हरि बहुबिधि कीन्हा। अति अनंद दासन्ह कहँ दीन्हा।।
मूल पाठ
बालचरित हरि बहुबिधि कीन्हा। अति अनंद दासन्ह कहँ दीन्हा।।
कछुक काल बीतें सब भाई। बड़े भए परिजन सुखदाई।।
स्रोत अभिलेख 1.203 · पुस्तक पृ. 202, 202
भावार्थ
मूल पाठ के बादभगवान्ने बहुत प्रकारसे बाललीलाएँ कीं और अपने सेवकोंको अत्यन्त आनन्द दिया। कुछ समय बीतनेपर चारों भाई बड़े होकर कुटुम्बियोंको सुख देनेवाले हुए॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 202 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बालचरित हरि बहुबिधि कीन्हा। अति अनंद दासन्ह कहँ दीन्हा।।
English explanation
AI-draft interpretation: Hari performed childhood deeds of many kinds and gave his devoted servants great joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बालचरित | बाल्यकाल की लीलाएँ | childhood deeds and pastimes |
| हरि | भगवान, यहाँ बालक राम | the Lord, here the child Rama |
| बहुबिधि | अनेक प्रकार से | in many ways |
| कीन्हा | कीं | performed |
| अति | बहुत | great |
| अनंद | आनंद | joy |
| दासन्ह | सेवक-भक्तों | devoted servants |
| कहँ | को | to |
| दीन्हा | दिया | gave |
2 कछुक काल बीतें सब भाई। बड़े भए परिजन सुखदाई।।
English explanation
After some time passed, all the brothers grew older, bringing happiness to their family.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कछुक | कुछ | some |
| काल | समय | time |
| बीतें | बीतने पर | having passed |
| सब | सभी | all |
| भाई | भाई | brothers |
| बड़े | बड़े | older |
| भए | हुए | became |
| परिजन | परिवार के लोगों को | to their family members |
| सुखदाई | सुख देने वाले | bringing happiness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.203
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 202
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 202, 202
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।