बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बालचरित अति सरल सुहाए। सारद सेष संभु श्रुति गाए।।
मूल पाठ
बालचरित अति सरल सुहाए। सारद सेष संभु श्रुति गाए।।
जिन कर मन इन्ह सन नहिं राता। ते जन बंचित किए बिधाता।।
स्रोत अभिलेख 1.204 · पुस्तक पृ. 203, 203
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामचन्द्रजीकी बहुत ही सरल (भोली) और सुन्दर (मनभावनी) बाललीलाओंका सरस्वती, शेषजी, शिवजी और वेदोंने गान किया है। जिनका मन इन लीलाओंमें अनुरक्त नहीं हुआ, विधाताने उन मनुष्योंको वञ्चित कर दिया (नितान्त भाग्यहीन बनाया)॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 203 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बालचरित अति सरल सुहाए। सारद सेष संभु श्रुति गाए।।
English explanation
AI draft: Rama’s childhood deeds are very simple and lovely; Sarasvati, Shesha, Shiva, and the Vedas sing of them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बालचरित | राम के बाल्यकाल के चरित | Rama’s childhood deeds |
| अति | अत्यंत | very |
| सरल | सरल, निष्कपट | simple and innocent |
| सुहाए | सुंदर, मनोहर | lovely |
| सारद | विद्या की देवी सरस्वती | Sarasvati, goddess of learning |
| सेष | शेषनाग | Shesha, the cosmic serpent |
| संभु | भगवान शिव | Shiva |
| श्रुति | वेद | the Vedas |
| गाए | गान करते हैं | sing of them |
2 जिन कर मन इन्ह सन नहिं राता। ते जन बंचित किए बिधाता।।
English explanation
Those whose minds take no delight in these childhood deeds have been left deprived by the Creator.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिन | जिन लोगों का | those whose |
| कर | का | possessive marker: whose |
| मन | मन | mind |
| इन्ह | इन बालचरितों | these childhood deeds |
| सन | में, से | in; with |
| नहिं | नहीं | not |
| राता | अनुरक्त, रमा हुआ | absorbed in affection |
| ते | वे | those |
| जन | लोग | people |
| बंचित | वंचित | deprived |
| किए | किए हैं | have made |
| बिधाता | विधाता, सृष्टिकर्ता ने | the Creator |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.204
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 203
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 203, 203
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।