बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बार बार बिरिदावलि भाषी। फिरे सकल रामहि उर राखी।।
मूल पाठ
बार बार बिरिदावलि भाषी। फिरे सकल रामहि उर राखी।।
बहुरि बहुरि कोसलपति कहहीं। जनकु प्रेमबस फिरै न चहहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.34 · पुस्तक पृ. 323, 324
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे सब बारंबार विरुदावली (कुलकीॢत) बखानकर और श्रीरामचन्द्रजीको हृदयमें रखकर लौटे। कोसलाधीश दशरथजी बार-बार लौटनेको कहते हैं, परन्तु जनकजी पे्रमवश लौटना नहीं चाहते॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 323 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बार बार बिरिदावलि भाषी। फिरे सकल रामहि उर राखी।।
English explanation
Repeatedly reciting praises, they all returned with Rama held in their hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बार | बार | time |
| बार | बार | after time |
| बिरिदावलि | गुणों और यश की प्रशस्ति | praises of virtues and glory |
| भाषी | कहकर | having recited |
| फिरे | लौट गए | returned |
| सकल | सभी | all |
| रामहि | राम को | Rama |
| उर | हृदय में | in their hearts |
| राखी | रखकर | having kept |
2 बहुरि बहुरि कोसलपति कहहीं। जनकु प्रेमबस फिरै न चहहीं।।
English explanation
Dasharatha, king of Kosala, repeatedly asks Janaka to turn back, but Janaka, overcome by affection, does not wish to return.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुरि | फिर | again |
| बहुरि | फिर | and again |
| कोसलपति | कोसल के राजा दशरथ | Dasharatha, king of Kosala |
| कहहीं | कहते हैं | says |
| जनकु | राजा जनक | King Janaka |
| प्रेमबस | प्रेम के वश में | overcome by affection |
| फिरै | लौटना | to turn back |
| न | नहीं | not |
| चहहीं | चाहते हैं | wishes |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.34
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 323
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 323, 324
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।