बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नृप करि बिनय महाजन फेरे। सादर सकल मागने टेरे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दराजा दशरथजीने विनती करके प्रतिष्ठित जनोंको लौटाया और आदरके साथ सब मंगनोंको बुलवाया। उनको गहने-कपड़े, घोड़े-हाथी दिये और प्रेमसे पुष्ट करके सबको सम्पन्न अर्थात् बलयुक्त कर दिया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 323 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नृप करि बिनय महाजन फेरे। सादर सकल मागने टेरे।।
भूषन बसन बाजि गज दीन्हे। प्रेम पोषि ठाढ़े सब कीन्हे।।
स्रोत अभिलेख 1.34 · पुस्तक पृ. 323, 324
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नृप करि बिनय महाजन फेरे। सादर सकल मागने टेरे।।
English explanation
King Janaka courteously bade farewell to the distinguished people and respectfully called all the supplicants.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नृप | राजा जनक | King Janaka |
| करि | करके | having made |
| बिनय | विनम्र निवेदन | a courteous request |
| महाजन | प्रतिष्ठित लोग | distinguished people |
| फेरे | विदा किए | sent back |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| सकल | सभी | all |
| मागने | याचकों को | the supplicants |
| टेरे | बुलाया | called |
2 भूषन बसन बाजि गज दीन्हे। प्रेम पोषि ठाढ़े सब कीन्हे।।
English explanation
He gave ornaments, garments, horses, and elephants, lovingly satisfying and enriching them all.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूषन | आभूषण | ornaments |
| बसन | वस्त्र | garments |
| बाजि | घोड़े | horses |
| गज | हाथी | elephants |
| दीन्हे | दिए | gave |
| प्रेम | प्रेम से | with affection |
| पोषि | पोषण करके; संतुष्ट करके | having nurtured and satisfied |
| ठाढ़े | संपन्न और संतुष्ट | well provided for and satisfied |
| सब | सबको | everyone |
| कीन्हे | कर दिया | made |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.34
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 323
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 323, 324
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।