बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बारिदनाद जेठ सुत तासू। भट महुँ प्रथम लीक जग जासू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमेघनाद रावणका बड़ा लड़का था, जिसका जगत्के योद्धाओंमें पहला नंबर था। रणमें कोई भी उसका सामना नहीं कर सकता था। स्वर्गमें तो [उसके भयसे] नित्य भगदड़ मची रहती थी॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 181 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बारिदनाद जेठ सुत तासू। भट महुँ प्रथम लीक जग जासू।।
जेहि न होइ रन सनमुख कोई। सुरपुर नितहिं परावन होई।।
स्रोत अभिलेख 1.18 · पुस्तक पृ. 180, 181
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बारिदनाद जेठ सुत तासू। भट महुँ प्रथम लीक जग जासू।।
English explanation
Ravana’s eldest son was Baridanada, whose standing among warriors was foremost in the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बारिदनाद | मेघनाद, रावण का पुत्र | Meghnada, Ravana’s son |
| जेठ | सबसे बड़ा | eldest |
| सुत | पुत्र | son |
| तासू | उस रावण का | of Ravana |
| भट | योद्धाओं | warriors |
| महुँ | में | among |
| प्रथम | पहली | foremost |
| लीक | श्रेणी या स्थान | rank or standing |
| जग | संसार में | in the world |
| जासू | जिसकी | whose |
2 जेहि न होइ रन सनमुख कोई। सुरपुर नितहिं परावन होई।।
English explanation
No one could stand against him in battle; the realm of the gods continually suffered defeat and rout.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहि | जिसके | whom |
| न | नहीं | not |
| होइ | होता; टिकता | stands |
| रन | युद्ध में | in battle |
| सनमुख | सामने | facing |
| कोई | कोई भी | anyone |
| सुरपुर | देवताओं के लोक में | in the gods’ realm |
| नितहिं | नित्य ही | continually |
| परावन | पराजय और पलायन | defeat and rout |
| होई | होता है | occurs |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.18
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 181
- सहायक विषय
- रावणादिका जन्म, तपस्या और उनका ऐश्वर्य तथा अत्याचार
- मुद्रित पृष्ठ
- 180, 181
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।