बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बाढ़े खल बहु चोर जुआरा। जे लंपट परधन परदारा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपराये धन और परायी स्त्रीपर मन चलानेवाले, दुष्ट, चोर और जुआरी बहुत बढ़ गये। लोग माता-पिता और देवताओंको नहीं मानते थे और साधुओं [की सेवा करना तो दूर रहा, उलटे उन] से सेवा करवाते थे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 184 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बाढ़े खल बहु चोर जुआरा। जे लंपट परधन परदारा।।
मानहिं मातु पिता नहिं देवा। साधुन्ह सन करवावहिं सेवा।।
स्रोत अभिलेख 1.184 · पुस्तक पृ. 184, 185
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बाढ़े खल बहु चोर जुआरा। जे लंपट परधन परदारा।।
English explanation
Wicked people, thieves, and gamblers multiplied greatly; they lusted after others’ wealth and wives.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बाढ़े | बढ़ गए | multiplied |
| खल | दुष्ट लोग | wicked people |
| बहु | बहुत | greatly |
| चोर | चोर | thieves |
| जुआरा | जुआरी | gamblers |
| जे | जो | who |
| लंपट | लालची और कामासक्त | greedy and lustful |
| परधन | दूसरों का धन | others’ wealth |
| परदारा | दूसरों की पत्नियाँ | others’ wives |
2 मानहिं मातु पिता नहिं देवा। साधुन्ह सन करवावहिं सेवा।।
English explanation
They honor neither mother, father, nor the gods, and make holy people serve them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मानहिं | सम्मान करते हैं | honor |
| मातु | माता को | mother |
| पिता | पिता को | father |
| नहिं | नहीं | not |
| देवा | देवताओं को | the gods |
| साधुन्ह | साधुओं | holy people |
| सन | से | from |
| करवावहिं | करवाते हैं | make them perform |
| सेवा | सेवा | service |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.184
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 184
- सहायक विषय
- रावणादिका जन्म, तपस्या और उनका ऐश्वर्य तथा अत्याचार
- मुद्रित पृष्ठ
- 184, 185
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।