बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जिन्ह के यह आचरन भवानी। ते जानेहु निसिचर सब प्रानी।।
मूल पाठ
जिन्ह के यह आचरन भवानी। ते जानेहु निसिचर सब प्रानी।।
अतिसय देखि धर्म कै ग्लानी। परम सभीत धरा अकुलानी।।
स्रोत अभिलेख 1.184 · पुस्तक पृ. 184, 185
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[श्रीशिवजी कहते हैं कि—] हे भवानी! जिनके ऐसे आचरण हैं, उन सब प्राणियोंको राक्षस ही समझना। इस प्रकार धर्मके प्रति [लोगोंकी] अतिशय ग्लानि (अरुचि, अनास्था) देखकर पृथ्वी अत्यन्त भयभीत एवं व्याकुल हो गयी॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 185 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जिन्ह के यह आचरन भवानी। ते जानेहु निसिचर सब प्रानी।।
English explanation
O Bhavani, regard all beings whose conduct is like this as demons.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिन्ह | जिन लोगों | those whom |
| के | का | of |
| यह | ऐसा | such |
| आचरन | आचरण | conduct |
| भवानी | हे भवानी, पार्वती | O Bhavani, goddess Parvati |
| ते | उनको | those |
| जानेहु | समझो | recognize as |
| निसिचर | राक्षस | demons |
| सब | सभी | all |
| प्रानी | प्राणी | beings |
2 अतिसय देखि धर्म कै ग्लानी। परम सभीत धरा अकुलानी।।
English explanation
Seeing the severe decline of righteousness, the Earth became deeply frightened and distressed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अतिसय | अत्यधिक | extreme |
| देखि | देखकर | having seen |
| धर्म | धर्म | righteousness |
| कै | की | of |
| ग्लानी | हानि और पतन | decline and deterioration |
| परम | अत्यंत | deeply |
| सभीत | भयभीत | frightened |
| धरा | पृथ्वी | the Earth |
| अकुलानी | व्याकुल हो गई | became distressed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.184
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 185
- सहायक विषय
- रावणादिका जन्म, तपस्या और उनका ऐश्वर्य तथा अत्याचार
- मुद्रित पृष्ठ
- 184, 185
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।