बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बाँधे बिरद बीर रन गाढ़े। निकसि भए पुर बाहेर ठाढ़े।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दशूरताका बाना धारण किये हुए रणधीर वीर सब निकलकर नगरके बाहर आ खड़े हुए। वे चतुर अपने घोड़ोंको तरह-तरहकी चालोंसे फेर रहे हैं और भेरी तथा नगाड़ेकी आवाज सुन-सुनकर प्रसन्न हो रहे हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 282 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बाँधे बिरद बीर रन गाढ़े। निकसि भए पुर बाहेर ठाढ़े।।
फेरहिं चतुर तुरग गति नाना। हरषहिं सुनि सुनि पवन निसाना।।
स्रोत अभिलेख 1.299 · पुस्तक पृ. 282, 283
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बाँधे बिरद बीर रन गाढ़े। निकसि भए पुर बाहेर ठाढ़े।।
English explanation
AI draft: Valiant men, pledged to uphold their valor and steadfast in battle, came out and stood outside the city.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बाँधे | बाँधकर; प्रतिज्ञा लेकर | having bound; having pledged |
| बिरद | वीरता का यश अथवा प्रतिज्ञा | a reputation or pledge of valor |
| बीर | वीर योद्धा | valiant warriors |
| रन | युद्ध में | in battle |
| गाढ़े | दृढ़; डटे रहने वाले | steadfast; resolute |
| निकसि | निकलकर | having come out |
| भए | हो गए | became; took their position |
| पुर | नगर के | of the city |
| बाहेर | बाहर | outside |
| ठाढ़े | खड़े | standing |
2 फेरहिं चतुर तुरग गति नाना। हरषहिं सुनि सुनि पवन निसाना।।
English explanation
Skilled riders maneuver the horses in various gaits; they rejoice on repeatedly hearing the drums sounding through the air.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फेरहिं | घुमाते हैं; चाल बदलवाते हैं | maneuver; make change gait |
| चतुर | कुशल घुड़सवार | skilled riders |
| तुरग | घोड़ों को | the horses |
| गति | चालों में | in gaits |
| नाना | अनेक प्रकार की | of various kinds |
| हरषहिं | हर्षित होते हैं | rejoice |
| सुनि | सुनकर | hearing |
| सुनि | बार-बार सुनकर | hearing repeatedly |
| पवन | हवा; वायु में | air; through the air |
| निसाना | नगाड़े; उनकी ध्वनि | kettledrums; their sound |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.299
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 282
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 282, 283
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।