बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बहु बिधि कीन्हि गाधिसुत पूजा। नाथ मोहि सम धन्य न दूजा।।
मूल पाठ
बहु बिधि कीन्हि गाधिसुत पूजा। नाथ मोहि सम धन्य न दूजा।।
कीन्हि प्रसंसा भूपति भूरी। रानिन्ह सहित लीन्हि पग धूरी।।
स्रोत अभिलेख 1.352 · पुस्तक पृ. 333, 333
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजाने गाधि-पुत्र विश्वामित्रजीकी बहुत तरहसे पूजा की और कहा—हे नाथ! मेरे समान धन्य दूसरा कोई नहीं है। राजाने उनकी बहुत प्रशंसा की और रानियोंसहित उनकी चरणधूलिको ग्रहण किया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 333 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बहु बिधि कीन्हि गाधिसुत पूजा। नाथ मोहि सम धन्य न दूजा।।
English explanation
The king honored Vishvamitra in many ways and said, ‘Revered lord, no one else is as blessed as I am.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहु | अनेक | many |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| कीन्हि | की | performed |
| गाधिसुत | गाधि-पुत्र विश्वामित्र की | of Vishvamitra, son of Gadhi |
| पूजा | पूजा | ritual worship |
| नाथ | हे स्वामी | revered lord |
| मोहि | मेरे | me |
| सम | समान | like |
| धन्य | धन्य; सौभाग्यशाली | blessed; fortunate |
| न | नहीं | not |
| दूजा | दूसरा कोई | any other person |
2 कीन्हि प्रसंसा भूपति भूरी। रानिन्ह सहित लीन्हि पग धूरी।।
English explanation
The king praised him greatly and, together with the queens, took the dust of his feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कीन्हि | की | offered |
| प्रसंसा | प्रशंसा | praise |
| भूपति | राजा दशरथ ने | King Dasharatha |
| भूरी | बहुत | abundant |
| रानिन्ह | रानियों के | the queens |
| सहित | साथ | together with |
| लीन्हि | ग्रहण की | took |
| पग | चरणों की | of his feet |
| धूरी | धूल | dust |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.352
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 333
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 333, 333
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