बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भीतर भवन दीन्ह बर बासु। मन जोगवत रह नृप रनिवासू।।
मूल पाठ
भीतर भवन दीन्ह बर बासु। मन जोगवत रह नृप रनिवासू।।
पूजे गुर पद कमल बहोरी। कीन्हि बिनय उर प्रीति न थोरी।।
स्रोत अभिलेख 1.352 · पुस्तक पृ. 333, 333
भावार्थ
मूल पाठ के बादउन्हें महलके भीतर ठहरनेको उत्तम स्थान दिया, जिसमें राजा और सब रनिवास उनका मन जोहता रहे (अर्थात् जिसमें राजा और महलकी सारी रानियाँ स्वयं उनके इच्छानुसार उनके आरामकी ओर दृष्टि रख सकें), फिर राजाने गुरु वसिष्ठजीके चरणकमलोंकी पूजा और विनती की। उनके हृदयमें कम प्रीति न थी (अर्थात् बहुत प्रीति थी)॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 333 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भीतर भवन दीन्ह बर बासु। मन जोगवत रह नृप रनिवासू।।
English explanation
He was given excellent lodging within the palace; the king and the queens continued to attend to his wishes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भीतर | भीतर | inside |
| भवन | महल के | the palace |
| दीन्ह | दिया | gave |
| बर | उत्तम | excellent |
| बासु | निवास | lodging |
| मन | उनकी इच्छा का | his wishes |
| जोगवत | ध्यान रखते | attending to |
| रह | रहे | continued |
| नृप | राजा | the king |
| रनिवासू | रानियाँ; अंतःपुर का स्त्री-समुदाय | the queens; the royal women's household |
2 पूजे गुर पद कमल बहोरी। कीन्हि बिनय उर प्रीति न थोरी।।
English explanation
Then the king worshipped Guru Vashishtha’s lotus feet and made a humble supplication with abundant love in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पूजे | पूजा की | worshipped |
| गुर | गुरु वसिष्ठ के | of Guru Vashishtha |
| पद | चरण | feet |
| कमल | कमल-समान | lotus-like |
| बहोरी | फिर | then; again |
| कीन्हि | की | made |
| बिनय | विनम्र प्रार्थना | humble supplication |
| उर | हृदय में | in the heart |
| प्रीति | प्रेम | love |
| न | नहीं | not |
| थोरी | थोड़ा | little |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.352
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 333
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 333, 333
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।