बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बहु धनुहीं तोरीं लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं।।
मूल पाठ
बहु धनुहीं तोरीं लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं।।
एहि धनु पर ममता केहि हेतू। सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतू।।
स्रोत अभिलेख 1.271 · पुस्तक पृ. 260, 261
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे गोसाईं! लड़कपनमें हमने बहुत-सी धनुहियाँ तोड़ डालीं। किन्तु आपने ऐसा क्रोध कभी नहीं किया। इसी धनुषपर इतनी ममता किस कारणसे है? यह सुनकर भृगुवंशकी ध्वजास्वरूप परशुरामजी कुपित होकर कहने लगे—॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 260 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बहु धनुहीं तोरीं लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं।।
English explanation
In childhood we broke many little bows; master, you never showed such anger.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहु | बहुत-सी | many |
| धनुहीं | छोटी धनुहियाँ | little bows |
| तोरीं | तोड़ीं | broke |
| लरिकाईं | बचपन में | in childhood |
| कबहुँ | कभी | ever |
| न | नहीं | not |
| असि | ऐसा | such |
| रिस | क्रोध | anger |
| कीन्हि | किया | showed |
| गोसाईं | हे स्वामी | O master |
2 एहि धनु पर ममता केहि हेतू। सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतू।।
English explanation
Why this attachment to this bow? Hearing this, Parashurama, the standard-bearer of Bhrigu’s lineage, spoke angrily.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| धनु | धनुष | bow |
| पर | के प्रति | toward |
| ममता | ममता; लगाव | attachment |
| केहि | किस | what |
| हेतू | कारण से | for reason |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| रिसाइ | क्रुद्ध होकर | becoming angry |
| कह | बोले | said |
| भृगुकुलकेतू | भृगुवंश के ध्वजस्वरूप परशुराम | Parashurama, standard-bearer of Bhrigu’s lineage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.271
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 260
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 260, 261
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