बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बहुरि बंदि खल गन सतिभाएँ। जे बिनु काज दाहिनेहु बाएँ।।
मूल पाठ
बहुरि बंदि खल गन सतिभाएँ। जे बिनु काज दाहिनेहु बाएँ।।
पर हित हानि लाभ जिन्ह केरें। उजरें हरष बिषाद बसेरें।।
स्रोत अभिलेख 1.4 · पुस्तक पृ. 23, 24
भावार्थ
मूल पाठ के बादअब मैं सच्चे भावसे दुष्टोंको प्रणाम करता हूँ, जो बिना ही प्रयोजन, अपना हित करनेवालेके भी प्रतिकूल आचरण करते हैं। दूसरोंके हितकी हानि ही जिनकी दृष्टिमें लाभ है, जिनको दूसरोंके उजडऩेमें हर्ष और बसनेमें विषाद होता है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 23 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1बहुरि बंदि खल गन सतिभाएँ। जे बिनु काज दाहिनेहु बाएँ।।
English explanation
AI draft: Next I bow sincerely to the company of the wicked, who oppose even those favorable to them, without cause.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुरि | फिर | next |
| बंदि | वंदना करके; प्रणाम करता हूँ | bowing to; I salute |
| खल | दुष्ट | wicked people |
| गन | समूह | company |
| सतिभाएँ | सच्चे भाव से | with sincere feeling |
| जे | जो | who |
| बिनु | बिना | without |
| काज | कारण या प्रयोजन | cause or purpose |
| दाहिनेहु | अनुकूल के भी | even toward someone favorable |
| बाएँ | प्रतिकूल | hostile |
2पर हित हानि लाभ जिन्ह केरें। उजरें हरष बिषाद बसेरें।।
English explanation
They count damage to others’ welfare as their own gain; others’ ruin delights them, and others’ flourishing grieves them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पर | दूसरों का | others’ |
| हित | भलाई | welfare |
| हानि | नुकसान | loss |
| लाभ | लाभ | gain |
| जिन्ह | जिनका | whose |
| केरें | उनके लिए | for them |
| उजरें | दूसरों के उजड़ने पर | when others are ruined |
| हरष | आनंद | delight |
| बिषाद | दुःख | grief |
| बसेरें | दूसरों के बसने-सँवरने पर | when others settle and prosper |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 23
- सहायक विषय
- खल-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 23, 24
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।