बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बहुत दिवस बीते एहि भाँती। जनु सनेह रजु बँधे बराती।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दइस प्रकार बहुत दिन बीत गये, मानो बराती स्नेहकी रस्सीसे बँध गये हैं। तब विश्वामित्रजी और शतानन्दजीने जाकर राजा जनकको समझाकर कहा—॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 317 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बहुत दिवस बीते एहि भाँती। जनु सनेह रजु बँधे बराती।।
कौसिक सतानंद तब जाई। कहा बिदेह नृपहि समुझाई।।
स्रोत अभिलेख 1.332 · पुस्तक पृ. 317, 317
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बहुत दिवस बीते एहि भाँती। जनु सनेह रजु बँधे बराती।।
English explanation
Many days passed in this way, as though the wedding guests were bound by a cord of affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुत | बहुत | many |
| दिवस | दिन | days |
| बीते | बीत गए | passed |
| एहि | इस | this |
| भाँती | प्रकार से | in this manner |
| जनु | मानो | as though |
| सनेह | स्नेह की | of affection |
| रजु | रस्सी से | by a cord |
| बँधे | बँधे हुए | bound |
| बराती | वरपक्ष के विवाह-अतिथि | guests accompanying the bridegroom |
2 कौसिक सतानंद तब जाई। कहा बिदेह नृपहि समुझाई।।
English explanation
Then Vishvamitra and Shatananda went to Janaka, king of Videha, and spoke to him persuasively.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कौसिक | कुशिकवंशी ऋषि विश्वामित्र | Vishvamitra, sage of Kushika’s lineage |
| सतानंद | जनक के पुरोहित शतानंद | Shatananda, Janaka’s priest |
| तब | तब | then |
| जाई | जाकर | having gone |
| कहा | कहा | said |
| बिदेह | विदेह देश के | of Videha |
| नृपहि | राजा जनक को | to King Janaka |
| समुझाई | समझाकर | explaining; persuading |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.332
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 317
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 317, 317
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