बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अब दसरथ कहँ आयसु देहू। जद्यपि छाड़ि न सकहु सनेहू।।
मूल पाठ
अब दसरथ कहँ आयसु देहू। जद्यपि छाड़ि न सकहु सनेहू।।
भलेहिं नाथ कहि सचिव बोलाए। कहि जय जीव सीस तिन्ह नाए।।
स्रोत अभिलेख 1.332 · पुस्तक पृ. 317, 317
भावार्थ
मूल पाठ के बादयद्यपि आप स्नेह [वश उन्हें] नहीं छोड़ सकते, तो भी अब दशरथजीको आज्ञा दीजिये। 'हे नाथ! बहुत अच्छा कहकर जनकजीने मन्त्रियोंको बुलवाया। वे आये और 'जय जीव कहकर उन्होंने मस्तक नवाया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 317 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अब दसरथ कहँ आयसु देहू। जद्यपि छाड़ि न सकहु सनेहू।।
English explanation
Now give Dasharatha permission to depart, although you cannot relinquish your affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| दसरथ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| कहँ | को | to |
| आयसु | प्रस्थान की अनुमति | permission to depart |
| देहू | दीजिए | please give |
| जद्यपि | यद्यपि | although |
| छाड़ि | छोड़ | relinquish |
| न | नहीं | not |
| सकहु | आप कर सकते | you can |
| सनेहू | स्नेह | affection |
2 भलेहिं नाथ कहि सचिव बोलाए। कहि जय जीव सीस तिन्ह नाए।।
English explanation
Saying, ‘Very well, revered sir,’ Janaka summoned his ministers. They bowed their heads, saying, ‘Victory to you; may you live long.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भलेहिं | अच्छा; ठीक है | very well |
| नाथ | हे स्वामी; आदरणीय महोदय | revered sir |
| कहि | कहकर | having said |
| सचिव | मंत्रियों को | the ministers |
| बोलाए | बुलाया | summoned |
| कहि | कहकर | saying |
| जय | जय हो | victory to you |
| जीव | दीर्घायु हों | may you live long |
| सीस | सिर | heads |
| तिन्ह | उन्होंने; उन मंत्रियों ने | they; those ministers |
| नाए | झुकाए | bowed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.332
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 317
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 317, 317
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।