बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बस्तु अनेक निछावर होहीं। भरीं प्रमोद मातु सब सोहीं।।
मूल पाठ
बस्तु अनेक निछावर होहीं। भरीं प्रमोद मातु सब सोहीं।।
पावा परम तत्व जनु जोगीं। अमृत लहेउ जनु संतत रोगीं।।
स्रोत अभिलेख 1.35 · पुस्तक पृ. 331, 332
भावार्थ
मूल पाठ के बादअनेकों वस्तुएँ निछावर हो रही हैं; सभी माताएँ आनन्दसे भरी हुई ऐसी सुशोभित हो रही हैं मानो योगीने परम तत्त्वको प्राप्त कर लिया। सदाके रोगीने मानो अमृत पा लिया,॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 331 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बस्तु अनेक निछावर होहीं। भरीं प्रमोद मातु सब सोहीं।।
English explanation
Many objects are offered as ceremonial gifts; all the mothers shine, filled with joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बस्तु | वस्तुएँ | objects |
| अनेक | अनेक | many |
| निछावर | न्योछावर | ceremonially offered as gifts |
| होहीं | होती हैं | are |
| भरीं | भरी हुई | filled |
| प्रमोद | आनंद से | with joy |
| मातु | माताएँ | mothers |
| सब | सभी | all |
| सोहीं | शोभा पा रही हैं | shine beautifully |
2 पावा परम तत्व जनु जोगीं। अमृत लहेउ जनु संतत रोगीं।।
English explanation
It was as though a yogi had attained the ultimate reality, or a chronically ill person had obtained nectar of immortality.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पावा | प्राप्त किया | attained |
| परम | परम | ultimate |
| तत्व | तत्त्व | reality |
| जनु | मानो | as though |
| जोगीं | योगी ने | a yogi |
| अमृत | अमृत | nectar of immortality |
| लहेउ | प्राप्त किया | obtained |
| जनु | मानो | as though |
| संतत | सदा | continually |
| रोगीं | रोगी ने | an ill person |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.35
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 331
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 331, 332
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।