बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जनम रंक जनु पारस पावा। अंधहि लोचन लाभु सुहावा।।
मूल पाठ
जनम रंक जनु पारस पावा। अंधहि लोचन लाभु सुहावा।।
मूक बदन जनु सारद छाई। मानहुँ समर सूर जय पाई।।
स्रोत अभिलेख 1.35 · पुस्तक पृ. 331, 332
भावार्थ
मूल पाठ के बादजन्मका दरिद्री मानो पारस पा गया। अंधेको सुन्दर नेत्रोंका लाभ हुआ। गूँगेके मुखमें मानो सरस्वती आ विराजीं और शूरवीरने मानो युद्धमें विजय पा ली॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 331 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जनम रंक जनु पारस पावा। अंधहि लोचन लाभु सुहावा।।
English explanation
It was as though someone poor from birth had found the philosopher’s stone, or a blind person had received the wonderful gift of sight.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनम | जन्म से | from birth |
| रंक | दरिद्र व्यक्ति | a destitute person |
| जनु | मानो | as though |
| पारस | पारस पत्थर | the philosopher’s stone |
| पावा | पा लिया | had found |
| अंधहि | अंधे व्यक्ति को | to a blind person |
| लोचन | आँखों का | of eyes or sight |
| लाभु | प्राप्ति | attainment |
| सुहावा | सुंदर और सुखद | wonderful and delightful |
2 मूक बदन जनु सारद छाई। मानहुँ समर सूर जय पाई।।
English explanation
It was as though Saraswati had come to dwell in a mute person’s mouth, or a warrior had won victory in battle.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मूक | मूक व्यक्ति के | of a mute person |
| बदन | मुख में | in the mouth |
| जनु | मानो | as though |
| सारद | सरस्वती, वाणी की देवी | Saraswati, goddess of speech |
| छाई | आ बसी हों | had come to dwell |
| मानहुँ | मानो | as if |
| समर | युद्ध में | in battle |
| सूर | वीर योद्धा ने | a valiant warrior |
| जय | विजय | victory |
| पाई | प्राप्त की हो | had won |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.35
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 331
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 331, 332
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।