बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
धूप दीप नैबेद बेद बिधि। पूजे बर दुलहिनि मंगलनिधि।।
मूल पाठ
धूप दीप नैबेद बेद बिधि। पूजे बर दुलहिनि मंगलनिधि।।
बारहिं बार आरती करहीं। ब्यजन चारु चामर सिर ढरहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.35 · पुस्तक पृ. 331, 332
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर वेदकी विधिके अनुसार मङ्गलोंके निधान दूलह और दुलहिनोंकी धूप, दीप और नैवेद्य आदिके द्वारा पूजा की। माताएँ बारंबार आरती कर रही हैं और वर-वधुओंके सिरोंपर सुन्दर पंखे तथा चँवर ढल रहे हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 331 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 धूप दीप नैबेद बेद बिधि। पूजे बर दुलहिनि मंगलनिधि।।
English explanation
With incense, lamps, and food offerings, they worshipped the bridegrooms and brides, embodiments of auspiciousness, according to Vedic rites.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धूप | धूप से | with incense |
| दीप | दीपों से | with lamps |
| नैबेद | नैवेद्य से | with food offerings |
| बेद | वेदों की | of the Vedas |
| बिधि | विधि के अनुसार | according to ritual prescription |
| पूजे | पूजन किया | worshipped |
| बर | दूल्हों का | the bridegrooms |
| दुलहिनि | दुलहिनों का | the brides |
| मंगलनिधि | मंगल के भंडार | treasures of auspiciousness |
2 बारहिं बार आरती करहीं। ब्यजन चारु चामर सिर ढरहीं।।
English explanation
They repeatedly perform arati and wave beautiful fans and yak-tail whisks over their heads.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बारहिं | बार-बार | repeatedly |
| बार | बार | times |
| आरती | आरती | ceremonial waving of lamps |
| करहीं | करती हैं | perform |
| ब्यजन | पंखे | fans |
| चारु | सुंदर | beautiful |
| चामर | चँवर | yak-tail whisks |
| सिर | सिरों पर | over their heads |
| ढरहीं | डुलाती हैं | wave |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.35
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 331
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 331, 332
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।