बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चारि सिंघासन सहज सुहाए। जनु मनोज निज हाथ बनाए।।
मूल पाठ
चारि सिंघासन सहज सुहाए। जनु मनोज निज हाथ बनाए।।
तिन्ह पर कुअँरि कुअँर बैठारे। सादर पाय पुनित पखारे।।
स्रोत अभिलेख 1.35 · पुस्तक पृ. 331, 332
भावार्थ
मूल पाठ के बादस्वाभाविक ही सुन्दर चार सिंहासन थे, जो मानो कामदेवने ही अपने हाथसे बनाये थे। उनपर माताओंने राजकुमारियों और राजकुमारोंको बैठाया और आदरके साथ उनके पवित्र चरण धोये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 331 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 चारि सिंघासन सहज सुहाए। जनु मनोज निज हाथ बनाए।।
English explanation
The four thrones were naturally beautiful, as though the god of love had made them with his own hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चारि | चार | four |
| सिंघासन | सिंहासन | thrones |
| सहज | स्वभावतः | naturally |
| सुहाए | सुंदर लगते थे | looked beautiful |
| जनु | मानो | as though |
| मनोज | कामदेव | the god of love |
| निज | अपने | his own |
| हाथ | हाथों से | with his hands |
| बनाए | बनाए हों | had made |
2 तिन्ह पर कुअँरि कुअँर बैठारे। सादर पाय पुनित पखारे।।
English explanation
The princesses and princes were seated on those thrones, and their sacred feet were respectfully washed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तिन्ह | उन सिंहासनों | those thrones |
| पर | पर | on |
| कुअँरि | राजकुमारियों को | the princesses |
| कुअँर | राजकुमारों को | the princes |
| बैठारे | बैठाया | seated |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| पाय | चरण | feet |
| पुनित | पवित्र | sacred |
| पखारे | धोए | washed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.35
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 331
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 331, 332
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