बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बर दायक प्रनतारति भंजन। कृपासिंधु सेवक मन रंजन।।
मूल पाठ
बर दायक प्रनतारति भंजन। कृपासिंधु सेवक मन रंजन।।
इच्छित फल बिनु सिव अवराधे। लहिअ न कोटि जोग जप साधें।।
स्रोत अभिलेख 1.7 · पुस्तक पृ. 87, 88
भावार्थ
मूल पाठ के बादशिवजी वर देनेवाले, शरणागतोंके दु:खोंका नाश करनेवाले, कृपाके समुद्र और सेवकोंके मनको प्रसन्न करनेवाले हैं। शिवजीकी आराधना किये बिना करोड़ों योग और जप करनेपर भी वाञ्छित फल नहीं मिलता॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 88 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बर दायक प्रनतारति भंजन। कृपासिंधु सेवक मन रंजन।।
English explanation
Shiva grants boons, removes the distress of those who seek refuge, is an ocean of compassion, and delights his devotees’ hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बर | वरदान | boons |
| दायक | देने वाले | giver of |
| प्रनतारति | शरणागतों की पीड़ा | the distress of those seeking refuge |
| भंजन | दूर करने वाले | remover of |
| कृपासिंधु | कृपा के समुद्र | an ocean of compassion |
| सेवक | भक्तों के | of devotees |
| मन | मन को | the hearts |
| रंजन | आनंद देने वाले | one who delights |
2 इच्छित फल बिनु सिव अवराधे। लहिअ न कोटि जोग जप साधें।।
English explanation
Without worshipping Shiva, the desired result cannot be attained even through countless practices of yoga and repetition of sacred formulas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| इच्छित | चाहा हुआ | desired |
| फल | परिणाम; फल | result |
| बिनु | बिना | without |
| सिव | भगवान शिव की | of Lord Shiva |
| अवराधे | आराधना किए | worshipping |
| लहिअ | पाया जा सकता | can be attained |
| न | नहीं | not |
| कोटि | करोड़ों | tens of millions of |
| जोग | योगाभ्यास | yogic practices |
| जप | मंत्र आदि का जप | repetition of sacred formulas |
| साधें | साधने पर भी | even upon practicing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 88
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 87, 88
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।