बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं तपु करै कुमारि तुम्हारी। भाविउ मेटि सकहिं त्रिपुरारी।।
मूल पाठ
जौं तपु करै कुमारि तुम्हारी। भाविउ मेटि सकहिं त्रिपुरारी।।
जद्यपि बर अनेक जग माहीं। एहि कहँ सिव तजि दूसर नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.7 · पुस्तक पृ. 87, 88
भावार्थ
मूल पाठ के बादयदि तुम्हारी कन्या तप करे, तो त्रिपुरारि महादेवजी होनहारको मिटा सकते हैं। यद्यपि संसारमें वर अनेक हैं, पर इसके लिये शिवजीको छोड़कर दूसरा वर नहीं है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 88 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जौं तपु करै कुमारि तुम्हारी। भाविउ मेटि सकहिं त्रिपुरारी।।
English explanation
If your daughter practices austerity, Shiva, the destroyer of Tripura, can erase even what is destined.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| तपु | तपस्या | austerity |
| करै | करे | practices |
| कुमारि | कन्या; पार्वती | daughter, Parvati |
| तुम्हारी | तुम्हारी | your |
| भाविउ | भावी विधान को भी | even what is destined |
| मेटि | मिटा | erase |
| सकहिं | सकते हैं | can |
| त्रिपुरारी | त्रिपुर का विनाश करने वाले शिव | Shiva, destroyer of Tripura |
2 जद्यपि बर अनेक जग माहीं। एहि कहँ सिव तजि दूसर नाहीं।।
English explanation
Although there are many bridegrooms in the world, there is none for this daughter other than Shiva.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जद्यपि | यद्यपि | although |
| बर | विवाह योग्य पुरुष; वर | bridegrooms |
| अनेक | बहुत से | many |
| जग | संसार | the world |
| माहीं | में | in |
| एहि | इस कन्या | this daughter |
| कहँ | के लिए | for |
| सिव | भगवान शिव | Lord Shiva |
| तजि | को छोड़कर | apart from |
| दूसर | कोई अन्य वर | any other bridegroom |
| नाहीं | नहीं है | there is none |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 88
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 87, 88
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।