बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बररै बालक एकु सुभाऊ। इन्हहि न संत बिदूषहिं काऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दबर्रै और बालकका एक स्वभाव है। संतजन इन्हें कभी दोष नहीं लगाते। फिर उसने (लक्ष्मणने) तो कुछ काम भी नहीं बिगाड़ा है, हे नाथ! आपका अपराधी तो मैं हूँ॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 267 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बररै बालक एकु सुभाऊ। इन्हहि न संत बिदूषहिं काऊ।।
तेहिं नाहीं कछु काज बिगारा। अपराधी में नाथ तुम्हारा।।
स्रोत अभिलेख 1.279 · पुस्तक पृ. 266, 267
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बररै बालक एकु सुभाऊ। इन्हहि न संत बिदूषहिं काऊ।।
English explanation
It is a child's natural tendency to speak foolishly; saints never blame such children.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बररै | बेसमझ बातें करता है | speaks foolishly |
| बालक | बालक | a child |
| एकु | एक | one |
| सुभाऊ | स्वभाव | natural tendency |
| इन्हहि | इन बालकों को | these children |
| न | नहीं | not |
| संत | संतजन | saints |
| बिदूषहिं | दोष देते हैं | blame |
| काऊ | कभी भी | ever |
2 तेहिं नाहीं कछु काज बिगारा। अपराधी में नाथ तुम्हारा।।
English explanation
He has spoiled none of your work. My lord, I am the one who has offended you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहिं | उसने | he |
| नाहीं | नहीं | not |
| कछु | कुछ भी | any |
| काज | काम | work; undertaking |
| बिगारा | बिगाड़ा | spoiled |
| अपराधी | अपराध करने वाला | the offender |
| में | मैं | I |
| नाथ | हे स्वामी | O lord |
| तुम्हारा | आपका; आपके प्रति | yours; against you |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.279
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 267
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 266, 267
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।