बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अति बिनीत मृदु सीतल बानी। बोले रामु जोरि जुग पानी।।
मूल पाठ
अति बिनीत मृदु सीतल बानी। बोले रामु जोरि जुग पानी।।
सुनहु नाथ तुम्ह सहज सुजाना। बालक बचनु करिअ नहिं काना।।
स्रोत अभिलेख 1.279 · पुस्तक पृ. 266, 267
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामचन्द्रजी दोनों हाथ जोड़कर अत्यन्त विनयके साथ कोमल और शीतल वाणी बोले— हे नाथ! सुनिये, आप तो स्वभावसे ही सुजान हैं। आप बालकके वचनपर कान न कीजिये (उसे सुना-अनसुना कर दीजिये)॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 266 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अति बिनीत मृदु सीतल बानी। बोले रामु जोरि जुग पानी।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: Joining both hands, Rama spoke in an exceedingly humble, gentle, and soothing voice.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| बिनीत | विनम्र | humble |
| मृदु | कोमल | gentle |
| सीतल | शांति देने वाली | soothing |
| बानी | वाणी | voice; speech |
| बोले | बोले | spoke |
| रामु | श्रीराम | Rama |
| जोरि | जोड़कर | joining |
| जुग | दोनों | both |
| पानी | हाथ | hands |
2 सुनहु नाथ तुम्ह सहज सुजाना। बालक बचनु करिअ नहिं काना।।
English explanation
Listen, my lord; you are naturally discerning. Do not pay heed to a child's words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनहु | सुनिए | please listen |
| नाथ | हे स्वामी | O lord |
| तुम्ह | आप | you |
| सहज | स्वभाव से | by nature |
| सुजाना | विवेकशील | discerning |
| बालक | बालक की | a child's |
| बचनु | बात | words |
| करिअ | कीजिए | please give |
| नहिं | नहीं | not |
| काना | कान; ध्यान | ear; heed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.279
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 266
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 266, 267
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।