बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बन बहु बिषम मोह मद माना। नदीं कुतर्क भयंकर नाना।।
मूल पाठ
बन बहु बिषम मोह मद माना। नदीं कुतर्क भयंकर नाना।।
स्रोत अभिलेख 1.38 · पुस्तक पृ. 61, 61
भावार्थ
मूल पाठ के बादमोह, मद और मान ही बहुत-से बीहड़ वन हैं और नाना प्रकारके कुतर्क ही भयानक नदियाँ हैं॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 61 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बन बहु बिषम मोह मद माना। नदीं कुतर्क भयंकर नाना।।
English explanation
Delusion, arrogance, and pride are very treacherous forests; varied faulty arguments are terrifying rivers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बन | वन | forests |
| बहु | बहुत | very |
| बिषम | दुर्गम, कठिन | treacherous |
| मोह | मोह, विवेकहीन आसक्ति | delusion and attachment |
| मद | मद, अहंकार का नशा | arrogant self-intoxication |
| माना | अभिमान | pride |
| नदीं | नदियाँ | rivers |
| कुतर्क | दोषपूर्ण तर्क | faulty arguments |
| भयंकर | भयावह | terrifying |
| नाना | विविध | various |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.38
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 61
- सहायक विषय
- मानसका रूप और माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 61, 61
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।