बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बनचर देह धरि छिति माहीं। अतुलित बल प्रताप तिन्ह पाहीं।।
मूल पाठ
बनचर देह धरि छिति माहीं। अतुलित बल प्रताप तिन्ह पाहीं।।
गिरि तरु नख आयुध सब बीरा। हरि मारग चितवहिं मतिधीरा।।
स्रोत अभिलेख 1.188 · पुस्तक पृ. 189, 189
भावार्थ
मूल पाठ के बादपृथ्वीपर उन्होंने वानरदेह धारण की। उनमें अपार बल और प्रताप था। सभी शूरवीर थे; पर्वत, वृक्ष और नख ही उनके शस्त्र थे। वे धीर बुद्धिवाले [वानररूप देवता] भगवान्के आनेकी राह देखने लगे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 189 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बनचर देह धरि छिति माहीं। अतुलित बल प्रताप तिन्ह पाहीं।।
English explanation
They assumed the bodies of forest creatures on earth; they possessed incomparable strength and prowess.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बनचर | वन में रहने वाले जीवों की | of forest-dwelling creatures |
| देह | देह | bodies |
| धरि | धारण करके | having assumed |
| छिति | पृथ्वी | earth |
| माहीं | में | on |
| अतुलित | अतुलनीय | incomparable |
| बल | शक्ति | strength |
| प्रताप | पराक्रम | prowess |
| तिन्ह | उनके | their |
| पाहीं | पास | in their possession |
2 गिरि तरु नख आयुध सब बीरा। हरि मारग चितवहिं मतिधीरा।।
English explanation
Mountains, trees, and claws were the weapons of all those warriors. Steadfast in mind, they awaited Hari's arrival.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गिरि | पर्वत | mountains |
| तरु | वृक्ष | trees |
| नख | नाखून या पंजों के नख | claws |
| आयुध | हथियार | weapons |
| सब | सभी | all |
| बीरा | वीर | warriors |
| हरि | भगवान हरि | Lord Hari |
| मारग | आगमन की राह | the way of arrival |
| चितवहिं | देखते रहते हैं | watch expectantly |
| मतिधीरा | धीर बुद्धि वाले | steadfast in mind |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.188
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 189
- सहायक विषय
- भगवान्का वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 189, 189
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।