बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गिरि कानन जहँ तहँ भरि पूरी। रहे निज निज अनीक रचि रूरी।।
मूल पाठ
गिरि कानन जहँ तहँ भरि पूरी। रहे निज निज अनीक रचि रूरी।।
यह सब रुचिर चरित मैं भाषा। अब सो सुनहु जो बीचहिं राखा।।
स्रोत अभिलेख 1.188 · पुस्तक पृ. 189, 189
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे [वानर] पर्वतों और जंगलोंमें जहाँ-तहाँ अपनी-अपनी सुन्दर सेना बनाकर भरपूर छा गये। यह सब सुन्दर चरित्र मैंने कहा। अब वह चरित्र सुनो जिसे बीचहीमें छोड़ दिया था॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 189 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 गिरि कानन जहँ तहँ भरि पूरी। रहे निज निज अनीक रचि रूरी।।
English explanation
They filled the mountains and forests here and there, dwelling in their own well-formed companies.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गिरि | पर्वतों में | in the mountains |
| कानन | वनों में | in the forests |
| जहँ | जहाँ | where |
| तहँ | तहाँ | there |
| भरि | भरकर | filling |
| पूरी | पूरी तरह | fully |
| रहे | रहने लगे | dwelt |
| निज | अपने | their own |
| निज | अपने-अपने | respective |
| अनीक | सैन्यदल | companies of warriors |
| रचि | बनाकर | having formed |
| रूरी | सुंदर | fine |
2 यह सब रुचिर चरित मैं भाषा। अब सो सुनहु जो बीचहिं राखा।।
English explanation
I have narrated all these delightful events. Now listen to the story that I had left aside midway.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह | this |
| सब | सारा | all |
| रुचिर | सुंदर | delightful |
| चरित | चरित या कथा | account of events |
| मैं | मैंने | I |
| भाषा | कहा | narrated |
| अब | अब | now |
| सो | वह कथा | that story |
| सुनहु | सुनो | listen |
| जो | जिसे | which |
| बीचहिं | बीच में ही | midway |
| राखा | छोड़ रखा था | had left aside |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.188
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 189
- सहायक विषय
- भगवान्का वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 189, 189
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।